उन्मनी वाङमय

६ फ़ेब्रुवारी १९३९

६ फेब्रुवारी:

एकूण श्लोक: ३

 

दुपारी ०३.००

 

तेजोमूर्तीस न माझ्या सावली।

गर्भवासास वा नलगे माउली।

‘गुरूश्री’ विराजली निराकार पाउलीं।

निर्नादश्रुति संविदाकारली! ।।    ।।१।।

   

श्यामसागरींचे संवित्-तुषार।

संकल्प अवस्थानाचे स्फुरत्कार।

षोडशबीजस्वांचे समक्षणसाक्षात्कार।

मत्स्यदर्पणीं बिंबले  ।।      ।।२।।

 

दुपारी ०३.३०

   

महानुभवाचा थैमानला संवर्त।

रजताचा शुक्तींत स्वरूपला विवर्त।

व्यष्टींत कीं परमेष्टि परिसमाप्त्।

बिंदूंत सिंधुदर्शन ।।            ।।३।।

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