उन्मनी वाङमय

अशुक्ल - अकृष्ण कर्मभूमिर्वा।

२०-८-४५

 

परमाणुगर्भ: विद्युद्लेशसंस्पृष्ट:। ९

विद्युत् स्थूलीभूता चितिवैशिष्ट्य प्रतीकम्। १०

विद्युन्मात्रा शक्तिबीजस्य आदिमा आविष्कृ ति:। ११

शक्ति: विनियुक्तो कारण स्पंद:। १२

 

कार्यकारणता पार्थक्य प्रतीते रधिष्ठानकथा। १३    

अंतर्यामिनो अनुभव श्रेणि: पंचमा मात्रा। १४

बिंदूसरित् प्रथमा मात्रा। (१५)

सकोणं रेषाद्वयं द्वितीया मात्रा। (१६)

 

कोणबाहुल्यं अधोगामिन्या: रेषाया: तृतीया मात्रा। (१७)

क्षणवैशिष्ट्यात् चतुर्था। (१८)

अंत:संधि: अनुसंधि: परासंधि:

वार्तिकप्रतीतीनाम् प्रतीकप्रतीतीनाम् पंचमा मात्रा। (१९)

अंत:संधिस्तु आकर्षणयोनि:

कृष्णकर्म भूमि र्वा। (२०)

 

अनुसंधि: विकर्षणयोनि:

शुक्लकर्म भूमिर्वा (२१)

परासंघि: संकर्षणयोनि :

अशुक्ल - अकृष्ण कर्मभूमिर्वा। (२२)

संसंधि: वियदवधूत कर्मविशेष:। (२३)

आमचा पत्ता

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