उन्मनी वाङमय

मधुविद्येचा महामणि मस्तकीं। अवधूतें स्थापिन्नला! ।।

१७/७/४२

 

अक्षरज्ञान संततीचा अभिषेक।

तेथ सुवर्णप्रवाहीं भास्वरलें शतैक।

`महासिद्धांत' मूर्तीचा कुरूष्व व्यतिरेक।

तेथ नव्व्याण्णवावें धूतदर्शन।। ।।१।।

   

अक्षरमात्रांत साध्य सिद्धांतलें।

`किरणावलींत अर्थबिंब प्रभातलें।

सप्त्व्याहृतींत 'रं' बीज माध्यान्हलें।

परात्परपदस्पर्श येथ शब्दीं  ।। ।।२।।    

 

नवनवांचा नवोत्तम गुणोत्कर्ष।

विश्ववाग्यज्ञाचा अमृतावशेष।

जहदजहल्लक्षणांचा उर्वरीत निर्देश।

वाक्य मूर्तींत या  ।। ।।३।।

   

अनाहतांतील एक एक लल्कार।

शरीरस्थ संवित्पूजनाचा वषट्कार।

वार्तिक अनुभूतींचा सोहंकार।

नव्व्याण्णवावें पूर्णदर्शन हें! ।। ।।४।।

   

वसुविद्येचा विभववासुकी।

वैश्वानरांचा कौस्तुभकौतुकी।

मधुविद्येचा महामणि मस्तकीं।

अवधूतें स्थापिन्नला! ।। ।।५।।

 

आमचा पत्ता

Dr. Samprasad and Dr. Mrs. Rujuta Vinod
Shanti-Mandir, 2100, Sadashiv Peth, Vijayanagar Col.
Behind S. P. college Pune - 411030 

 

दूरध्वनी क्रमांक

+91 90227 10632

 
 
 

ई-मेल आयडी

Copyright 2022. Maharshi Nyaya-Ratna Vinod by Web Wide It

Search